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कब आएगी इस देश में दिवाली



कुछ रोज पहले सड़क पर चलते 
देखा एक मजदूर को
एक हाथ में बेलचा 
और दूसरे हाथ से थामे 
ऊँगली एक ५ वर्ष के बालक की 

मजदूर- साहब ये पटाखा कितने का दिया?
बच्चे की आंखे चमक उठी| 
होठों पर मुस्कान और चेहरे के भाव 
मानो कई दिनों की वर्षा के बाद 
आज सूर्य प्रकाशवान हुआ हो|

दुकानदार- यह १००, यह २०० और ये ५०० का
१०० वाला दे दो साहब, दाम थोड़े सही लगाना| 

आज सुबह सड़क पर देखा 
एक मजदूर का बच्चा 
सड़क पर अधजले पटाखों को बीनता हुआ|
मैं देखता रहा
कुछ ही देर में काफी बच्चे इक्कठा हो गए

कागज़ के एक टुकड़े पर, 
सारा बारूद जमा कर 
घंटो की जद्दोजहद के बाद
उस बारूद को राख करते 
चंद घड़ियों की ख़ुशी 
वाह आज तो दिन बन गया|

इसी बीच नज़र पड़ी टीवी पर
अयोध्या में भव्य दिवाली का आयोजन 
त्रेता युग के बाद आज पहली बार 
राम सीता उतरे आकाश से
हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा के बीच 
२ लाख दीयों के प्रज्जवलन से स्वागत कार्यक्रम 
देखने के लिए बने रहे 
लौटेंगे ब्रेक के बाद|

हम भी बने रहे, 
राम मंदिर पुनर्निर्माण की बात हो रही थी
करोड़ों के स्वागत के बाद
फिर करोड़ों के निवेश की सरकारी तैयारी 
सत्ता के लोभ में आबादी का बटवारा करती 
जान के धन को लुटाती, ये हमारी लुभावनी सरकार|

यही धन कही विकास में लगाते साहब 
शायद कुछ लोगो के घर में स्थिर दिवाली आ जाती|
यही धन विकास में लगाते शायद 
कुछ और लोगो को नौकरी मिल जाती
शायद कोई मजदूर का बच्चा 
पटाखे-मिठाइयों से वंचित नहीं रहता|

परन्तु आप सही हैं 
कर नहीं सकते
अगर विकास हो गया तो मजदूरी कौन करेगा
कौन करेगा चंद वोटों के लिए
भव्य मंदिरों का निर्माण, 
और कौन आएगा प्रचार रैलियों में भीड़ बढ़ाने|

सोचने पर मजबूर हूँ, 
कब आएगी इस देश में दिवाली
कुछ के लिए नहीं, सबके लिए|

                                                             -Akhil Tewari




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